आपकी हॉलीडे खराब कर सकता है सीजनल डिप्रेशन, जानें इसके लक्षण, कारण और निपटने के उपाय

0
12

हाइलाइट्स

मूड को प्रभावित करने वाले ब्रेन केमिकल सेरोटोनिन में गिरावट भी एसएडी की एक बड़ी वजह है.
सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से बचने के लिए धूप लेना बहुत अधिक जरूरी है.

Seasonal Depression During the Holidays: समय अपनी रफ्तार से चलता रहता है. समय बढ़ने के साथ साथ मौसम भी बदलता है. मौसम का बदलाव प्राकृतिक व्यवहार है. हालांकि यह बदलाव हमें पहले से ही मालूम रहता लेकिन फिर भी इसका हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ता है. मौसम बदलने के साथ ही कई तरह की शारीरिक समस्याएं होती हैं. ऐसी ही एक समस्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD). यह मौसम पर आधारित एक भावनात्मक विकार है जिसे सीजनल डिप्रेशन भी कहा जाता है. सीजनल डिप्रेशन का सबसे बड़ा प्रभाव आपकी छुट्टियों में देखने को मिलता है.

मायोक्लीनिक की खबर के अनुसार एक रिपोर्ट के अनुसार मानसिक बीमारी पर राष्ट्रीय गठबंधन के एक छोटे से सर्वेक्षण के मुताबिक, एसएडी जैसी मानसिक स्वास्थ्य स्थिति वाले लगभग 64 प्रतिशत लोगों ने इस बात को स्वीकार किया कि त्योहारी सीजन या फिर दिसंबर की छुट्टियां साल के पहले के शानदार समय जैसी नहीं महसूस होतीं. एसएडी से पीड़ित लोगों ने बताया कि छुट्टियों के समय उनके लक्षण और अधिक खराब हो जाते हैं. आम तौर पर सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के लक्षण शुरुआती सर्दियों के दिनों से दिखाई देने लगते हैं और यह फरवरी मार्च में वसंत के मौसम में खत्म होने लगते हैं.

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के लक्षण

  • दिन एक अधिकांश समय में उदास और मायूस रहना और उन कार्यों में रुचि कम हो जाना जिन्हें पहले बार बार करना पसंद करते थे.
  • सुस्ती महसूस करना और ऊर्जा में गिरावट आना
  • पहले से ज्यादा नींद आने की समस्या
  • अधिक भोजन करना और कार्बोहाइड्रेड के प्रति अधिक रुचि होना
  • किसी भी काम में फोकस करने में दिक्कत होना
  • जल्दी जल्दी मूड बदलना
  • नेगेटिव विचारों का मन में आना
  • दोस्तों या परिजनों के साथ समय बिताने में बंधा हुआ महसूस करना
  • व्यवहार में चिड़चिड़ापन आना

National Epilepsy Day 2022: मिर्गी का दौरा सिर्फ दिमाग ही नहीं, दिल के लिए भी खतरनाक

सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के कारण
बॉयोलॉजिकल क्लॉक: एक्सपर्ट की मानें तो सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर होने के कारणों का अभी पूरी तरह से पता नहीं चल सका है. लेकिन, कुछ लोगों का मानना है कि पतझड़ और सर्दियों के दौरान धूप का कम स्तर इसका एक बड़ा कारण हो सकता है. धूपी की कमी से शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और यह आपके बॉयोलॉजिकल क्लॉक को प्रभावित करती है जिससे अवसाद की भावना उत्पन्न हो जाती है.

सेरोटोनिन का स्तर: कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि मूड को प्रभावित करने वाले ब्रेन केमिकल सेरोटोनिन में गिरावट की वजह से सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर की समस्या होने लगती है. कम धूप सेरोटोनिन में गिरावट का कारण बन सकती है.

मेलाटोनिन का स्तर: मौसम का बदलाव शरीर में मेलाटोनिन के स्तर को प्रभावित करता है. मेलाटोनिन एक ऐसा हार्मोन है जो कि नींद के पैटर्न और मूड को नियंत्रित करता है और इसके लेवल में बदलाव से नींद के पैटर्न में बड़ा बदलाव आ जाता है.

परिवार की डाइट को इन 9 तरीकों से बनाएं हेल्दी, कई बीमारियों से होगा बचाव

विटामिन डी की कमी: हमारे शरीर में सेरोटोनिन के स्तर को विटामिन डी से बढ़ावा मिलता है. सूरज की रोशनी विटामिन डी का एक प्राकृति स्रोत हैं. धूप कम होने से विटामिन डी की कमी होने लगती है और इससे सेरोटोनिन का स्तर घटने लगता है. सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर से बचने के लिए विटामिन डी का पर्याप्त मात्रा मे होना जरूरी है.

सीजनल डिप्रेशन से बचने के तरीके

  • डेली रूटीन में बदलाव समझ आने पर एक्सपर्ट से तुरंत मिलें.

  • हर दिन कम से कम 20-25 मिनट तक धूम में बिताएं.

  • आप लाइट थेरेपी लेने पर भी विचार कर सकते हैं.

  • एक कमरे में बंद रहने के बजाए बाहर घूमने जरूर जाएं चाहे धूप हो या न हो.

  • ज्यादा से ज्यादा समय लोगों के साथ बिताएं.

  • परिवार के लोगों के बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं.

  • रात में देर तक जगने और नेगेटिव विचार लाने से बचें.

  • एक्सरसाइज करें और खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें

Tags: Depression, Health, Lifestyle