ऑनलाइन डिलीवरी को लेकर IIT जोधपुर बना रहा नया टूल, होगी चेहरे की पहचान

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जोधपुर. लगातार बढ़ते ऑनलाइन के ट्रेंड, ऑनलाइन डिलीवरी को ध्यान में रखते हुए आईआईटी जोधपुर में संगीत के साथ एक विशेष सहयोग कर एक टूल को विकसित किया है. इस टूल के विकसित होने के साथ ही ऑनलाइन डिलीवरी के साथ ही कई सहूलियत भी मिलेंगी. आईआईटी जोधपुर व स्विगी ने डिलीवरी एक्जीक्यूटिव्स की सुचारू ऑन-बोर्डिंग की सुविधा के लिए फेस रिकॉग्निशन टूल विकसित किया है. स्विगी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जोधपुर (आईआईटीजे) के साथ एक सहयोग किया है, जहां संस्थान के शोधकर्ताओं के साथ स्विगी की एप्लाइड रिसर्च टीम कंप्यूटर विजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित एक अत्याधुनिक फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम विकसित करेगी.

नव विकसित फेस रिकग्निशन सिस्टम स्विगी प्लेटफॉर्म की एआई क्षमताओं को मजबूत करेगा और प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और अनुपालन को बढ़ाएगा, इस प्रकार ग्राहकों और रेस्तरां भागीदारों के लिए एक आसान अनुभव प्रदान करने का बहतर विकल्प भी साबित होगा.

ऐसे काम करेगा यह नव विकसत टूल

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के सहयोग से निर्मित यह टूल स्विगी ने एआई-संचालित क्षमता की आवश्यकता को पहचाना है जो विभिन्न प्रकार की छवियों और सेल्फी से स्वचालित रूप से चेहरों का पता लगा सकता है और निकाल सकता है. दरअसल निकाले गए चेहरों का उपयोग ऐप के माध्यम से ली गई सेल्फी से मिलान करके किसी व्यक्ति की पहचान को सत्यापित करने के लिए किया जाता है. इसके अलावा, यह तकनीक स्विगी को धोखाधड़ी का पता लगाने, प्रतिरूपण, उपस्थिति हस्तांतरण आदि जैसे विभिन्न अनुप्रयोगों में लाभान्वित करने में सक्षम बनाएगी.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के साथ हुए सहयोग पर बात करते हुए स्विगी में एप्लाइड रिसर्च के वीपी हेमंत मिश्रा का कहना है कि हम एक समाधान तैयार कर रहे हैं जो डिलीवरी भागीदारों के लिए व्यापक पृष्ठभूमि की जांच को सुव्यवस्थित करेगा और प्रतिरूपण और धोखाधड़ी को नियंत्रित करने और कम करने में हमारी मदद करेगा.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के आचार्य (प्रोफेसर) मयंक वत्स का कहना है कि आईआईटी जोधपुर की शोध टीम एक दशक से अधिक समय से विवश और अप्रतिबंधित वातावरण के लिए चेहरा पहचान समाधान डिजाइन करने के लिए काम कर रही है. यह सेल्फी के साथ संयुक्त दस्तावेज़ आईडी के वास्तविक-विश्व अनुप्रयोगों को संबोधित करने के लिए अनुसंधान को आगे बढ़ाने का एक अवसर है.

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FIRST PUBLISHED : November 25, 2022, 16:36 IST