कंटीली झाड़ियों में लगने वाला ये छोटा सा फल बड़े काम का है, जानिए फायदे

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रिपोर्ट: पुष्पेंद्र मीणा

दौसा: भारत वर्ष में पाये जाने वाले फलों में बेर एक प्राचीनतम फल है जिसका वर्णन अनेक ग्रन्थों एवं साहित्यों में मिलता है. ‘शबरी के बेर का वर्णन तो रामायण में सर्वविदित है ही. वेद, पुराण व अन्य धार्मिक ग्रन्थों में भी इसकी व्याख्या की गयी है. भारतीय बेर जिसका वनस्पतिक नाम जिजिफस मोरीसियाना है, ‘रैहमनेसी’ कुल का सदस्य है. बेर के पौधे अपने आपको विपरीत परिस्थितियों में ढालने की अद्भुत क्षमता रखते हैं. वहीं दौसा जिले में अनेक पहाड़ियों पर भी इस समय बेर आ रहे हैं. इन्हें तोड़ने के लिए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

बेर का फल पौष्टिक तत्वों से परिपूर्ण
कृषि पर्यवेक्षक लक्ष्मीनारायण कोली ने बताया कि “बेर का फल पौष्टिक तत्वों से परिपूर्ण है. जिसमें विटामिन, खनिज लवण, शर्करा इत्यादि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. इसके फल पौष्टिक गुणों में हिमालय के सेव से कहीं कम नहीं हैं. ऐसा पाया गया है कि प्रति 100 ग्राम बेर के फल में 0.8-0.9 ग्रा. स्टार्च, 4.9-12.4 ग्रा. शर्करा 03-0.5 ग्रा. राख, 0.03 0.04 ग्रा. कैल्सियम, 0.01-0.02 ग्रा. फॉस्फोरस, 0.5-1.0 मि.ग्रा. लौह तत्व और 66-133 मि. ग्रा. विटामिन-सी प्राप्त होता है. इसके अतिरिक्त बेर के फलों में 16-18° ब्रिक्स कुल घुलनशील ठोस और 0.1-0.5 प्रतिशत अम्लता भी पायी जाती है. बेर के फलों को ताजा एवं परिरक्षित पदार्थ के रूप में प्रयोग किया जाता है.”

बेर सेवन के फायदे
सिकराय अस्पताल के डाक्टर मनोज मीना ने बताया कि बेर औषधीय उपयोग के लिए प्रयुक्त होते हैं. फल सेवन करने से रक्त साफ होता है और पाचन क्रिया ठीक रहती है. कच्चे फल के सेवन से कफ बढ़ता है जबकि पका हुआ फल शीतल, पचनीय और शक्तिवर्धक आहार माना गया है. अतिसार में इसकी छाल को दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा प्रणाली में बेर के फल, पत्तियां, छाल, आदि का प्रयोग विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता है.

बेर तोड़ने में होती है परेशानी
मौहलाई निवासी महेंद्र मीणा ने बताया कि पहाड़ियों पर बेर आते हैं, वह बेर दीपावली के आसपास में पक कर तैयार होते हैं उन्हें तोड़ने के लिए गांवों के बच्चों को महिलाओं को पुरुषों को काफी परेशानी होती है. क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र बहुत ऊंचा होता है और उस पर चढ़कर लोग बेर तोड़ने के लिए पहुंचते हैं. वहां पहुंचने के बाद एक कटीली झाड़ियों के बीच आते हैं जिससे कई बार हाथों में कटीली झाड़ियां लग जाने से खून तक हाथों में निकल आते हैं जिसके चलते बेर तोड़ने वालों को काफी परेशानी होती है. स्वाद की बात करें तो एक बेर मीठा तो एक बेर खट्टा भी मुंह में आ जाता है जिससे अलग ही स्वाद आता है.

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FIRST PUBLISHED : November 15, 2022, 13:05 IST