कोरोना के बार-बार इंफेक्शन से बढ़ जाता है मौत का खतरा, नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

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Corona Infection Increases the Risk of Death: कोरोना महामारी की शुरुआत करीब 3 साल पहले हुई थी. तब से अब तक इस महामारी को लेकर वैज्ञानिक रिसर्च में जुटे हुए हैं. कोरोना पर हुई अब तक की स्टडी में यह सामने आया था कि इसके प्रारंभिक संक्रमण से शरीर का लगभग हर अंग प्रभावित होता है और इसके कुछ अल्पकालिक और कुछ दीर्घकालिक जोखिम देखने को मिल सकते हैं. वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि पहले संक्रमण के बाद एंटीबॉडी प्राप्त करने और वैक्सीन या फिर बूस्टर डोज लेने वाले लोग, दोबारा भी इसकी चपेट में आ सकते हैं.

यूरेक अलर्ट की खबर के अनुसार कोविड 19 को लेकर अब सेंट लुइस में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और वेटरन्स अफेयर्स सेंट लुइस हेल्थ केयर सिस्टम की एक नई स्टडी सामने आई है. इस स्टडी में कोविड के दोबारा संक्रमण होने के परिणामों को दर्शाया गया है. शोधकर्ताओं ने पाया कि बार बार संक्रमण होने से शरीर के कई अंगों में बीमारियों का अतिरिक्त जोखिम बढ़ जाता है.

फेफड़े और हृदय रोग का बढ़ जाता है जोखिम
कोरोना वायास के बार बार चपेट में आने से फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क, शरीर में रक्त की समस्या, मस्कुलोस्केलेटल और गैस्टोइंस्टेंटाइनल प्रणाली को काफी नुकसान पहुंचता है. इसके साथ ही संक्रमण मौत के खतरे को भी कई गुना बढ़ा देता है. दोबारा संक्रमण होने से डायबिटीज, गुर्दे की बीमारी और मानसिक स्वास्थ्य जैसी दिक्कतों में इजाफा करता है. कोविड की इस नई स्टडी के निष्कर्ण 10 नवंबर को नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुए हैं.

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एक्सपर्ट ने कहा कि हमारे शोध से पता चलता है कि दूसरी और तीसरी बार संक्रमण होने से शरीर में दूसरी कई बीमारियों और स्वास्थ्य जोखिम का तेजी से खतरा बढ़ जाता है. संक्रमण के बाद के पहले 30 दिन और आगे के कुछ महीनों तक बीमारियों के चपेट में आने का जोखिम बना रहता है जिसे लांग कोविड के लक्षण के तौर पर भी जाना जाता है. स्टडी में यह भी खुलासा हुआ कि जितनी बार संक्रमण होगा जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा.

अमेरिका में सामने आ रहे कोविड के नए वेरिएंट
विशेषज्ञ ने कहा कि वायरस के संपर्क से बचना बहुत जरूरी है चाहे फिर आप दो बार क्यों न चपेट में आ चुके हों. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका में सर्दियों के मौसम में कोविड के नए वेरिएंट तेजी से उभर रहे हैं और वायरस का म्यूटेशन भी बढ़ रहा है. ऐसे में संक्रमण से बचना करने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए.

5.8 मिलियन लोगों के डेटा का किया गया विश्लेषण
इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स द्वारा बनाए गए डेटाबेस में लगभग 5.8 मिलियन लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया. शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी के लिए 1 मार्च, 2020 से 6 अप्रैल, 2022 तक COVID-19 संक्रमण के लिए सकारात्मक परीक्षण नहीं करने वाले 5.3 मिलियन लोगों का डेटा तैयार किया. शोधकर्ताओं ने इसी समय सीमा का उपयोग करते हुए ऐसे 443,000 से अधिक लोगों का डेटा तैयार किया जिन्होंने COVID-19 संक्रमण के लिए सकारात्मक परीक्षण किया था, और करीब 41,000 ऐसे लोगों का चुनाव किया जिन्हें इसी समय सीमा के दौरान दो या दो अधिक बार संक्रमण हुआ था.

ये वेरिएंट थे जोखिम के लिए जिम्मेदार
अध्ययन में यह सामने आया कि संक्रमण के लिए कोविड 19 वेरिएंट जैसे डेल्टा, ओमाइक्रोन और BA.5 के लिए जिम्मेदार थे. नकारात्मक परिणाम उन लोगों के साथ-साथ गैर-टीकाकरण वाले लोगों में हुए, जिन्होंने दोबारा संक्रमण से पहले शॉट लिया था. कुल मिलाकर, शोधकर्ताओं ने पाया कि कोविड ​​​​-19 का जिन लोगों को दोबारा संक्रमण हुआ उनमें संक्रमण की वजह से मरने की संभावना दोगुनी थी और बिना पुन: संक्रमण वाले लोगों की तुलना में अस्पताल में भर्ती होने की संभावना तीन गुना अधिक थी.

इसके अतिरिक्त लोगों में संक्रमण दोहराने की वजह से फेफड़ों की समस्या के विकसित होने की संभावना साढ़े तीन गुना अधिक थी. वहीं बार बार संक्रमण के बाद हृदय रोग होने की संभावना तीन गुना अधिक थी जबकि वहीं वायरस की चपेट में एक बार आने से मस्तिष्क संबंधी बीमारियों की शिकायत की संभावना 1.6 गुना बढ़ चुकी थी.

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