खेलो इंडिया : मध्य प्रदेश की ये लड़कियां फायर मलखंभ को दिलाने निकली हैं नई पहचान

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रतलाम. मलखंभ एक ऐसा खेल है जिसमें अक्सर फुर्तीले और चुस्त-दुरुस्त युवा हिस्सा लेते हैं. सोशल मीडिया और वीडियो गेम के शोर में ये भारतीय पारंपरिक कला धीरे धीरे लुप्त होती जा रही है. लेकिन रतलाम की इन बेटियों ने इस कला को बचाने का बीड़ा उठाया है. रूढ़ियों की बेड़ियों को तोड़ दिया है यह बच्चियां कम सुविधाओं में भी आग के साथ मलखंभ पर हैरतअंगेज संतुलन बना रही हैं.

खुद की जुटाई हुई सुविधाओं के दम पर सर्दी में भी पसीना बहा देने वाली इन बेटियों पर हमें गर्व है. ये मेहनती बेटियां ही हमारे देश का वह सुनहरा भविष्य हैं, जो अपने दम पर स्वर्णिम कल की नींव रख रही हैं. रतलाम की जवाहर व्यायामशाला में हर शाम इन लड़कियों की टोली मलखंभ पर करतब करती नजर आती है. इस टोली में छोटी से लेकर बड़ी हर उम्र की बच्चियां अपनी मेहनत के बूते पर मलखंभ की ऊंचाई को भी बौना साबित कर रही हैं.

मलखंभ करने वाली बच्चियों की उम्र महज 7 से 22 साल के बीच 
अब इन बच्चियों ने एक कदम आगे बढ़कर फायर मलखंभ में आग के साथ संतुलन बनाकर मलखंभ की खूबसूरती बढ़ा दी है. मलखंभ करने वालियों की टोली में 7 से लेकर 22 साल उम्र तक की लड़कियां हैं. यह बीते 3 महीने से आग के साथ मलखंभ पर अपना जौहर दिखा रही हैं. इन बच्चियों का टारगेट खेलो इंडिया के जरिए मलखंभ की नई ऊंचाइयों को छूना है. इसके साथ ही यह लड़कियां पूरे विश्व में मलखंभ को पहचान दिलाना चाहती हैं.

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सुविधाओं की कमी
मलखंभ खिलाड़ी एकता सोलंकी और श्रुति गुप्ता से बात करने पर उन्होंने बताया कि सुविधाओं के नाम पर उनके पास कुछ खास नहीं है. जो भी चल रहा है व्यायामशाला के संचालक खुद के दम पर चला रहे हैं. इस खेल के प्रशिक्षक बताते हैं कि बच्चियों में सीखने की ललक है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में सीखने की स्पीड को कम कर दिया है. खेल की दुनिया में नए आयाम गढ़ रही इन बच्चियों के फायर मलखंभ की चर्चा जोरों पर है.

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