देहरादून के स्वयं सहायता समूह मजबूत कर रहे महिलाओं की आवाज, झाड़ू-बिस्कुट से लेकर बना रहे ये सामान

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रिपोर्ट- हिना आज़मी

देहरादून. उत्तराखंड के पहाड़ से लेकर मैदान तक महिलाएं मेहनत और लगन के साथ हर क्षेत्र में काम कर रही हैं. वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अभी भी आधुनिक समाज की पहुंच से काफी दूर हैं. ऐसे में महिलाओं के उत्थान के लिए कई महिला स्वयं सहायता समूह (Women Self Help Group in Dehradun) काम कर रहे हैं. अगर राजधानी देहरादून की बात करें, तो कई स्वयं सहायता समूह महिलाओं के साथ अलग-अलग उत्पादों पर काम कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं और इसी के साथ उन्हें रोजगार भी दे रहे हैं.

आज हम आपको देहरादून के ऐसे ही कुछ महिला स्वयं सहायता समूह के बारे में बताने जा रहे हैं, जो न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहे हैं बल्कि पहाड़ी संस्कृति को भी बढ़ावा दे रहे हैं.

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देव जागृति महिला स्वयं सहायता समूह: राजधानी देहरादून में इस समूह की महिलाओं द्वारा छोटे पैमाने पर फिनायल, झाड़ू, वाइपर आदि के साथ-साथ कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं.

उद्यमी महिला कल्याण समिति: महिलाओं के कल्याण के लिए उन्हें उद्यमी बनाते हुए ऑर्गेनिक खेती को बढ़ाने का काम यह समूह कर रहा है. इसमें महिलाएं पहाड़ी उत्पादों के साथ कई तरह के व्यंजन बनाती हैं जैसे-रोटाना, अरसे, मंडुए के बिस्कुट आदि . इसके साथ उन्हें बेचकर आमदनी होती है.

गोमती आजीविका स्वयं सहायता समूह: इस समूह की महिलाएं आजीविका चलाने के लिए बैग आदि बनाती हैं. इसी के साथ ही उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने के लिए उत्तराखंड के परिधानों पर काम करती हैं जैसे- पिछौड़ा, गुलोबन्द आदि बनाती हैं.

स्वदेश कुटुम्ब स्वयं सहायता समूह: स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं का यह समूह हिंदू संस्कृति को बचाने का काम भी करता है. गौमाता के गोबर से अगरबत्ती, दीए, धूपबत्ती, मूर्तियां और इसी के साथ ही कई तरह के उत्पाद इस समूह की महिलाएं बनाती हैं.

सरयू आजीविका स्वयं सहायता समूह: इस समूह की महिलाएं वेस्ट मैटेरियल पर काम करती हैं यानी जो भी वस्तु बच जाती है, उसे उपयोग कर कुछ अच्छा प्रोडक्ट बनाया जाता है. जैसे महिलाएं सिलाई का काम कर रही हैं और जो भी कतरन बच जाती हैं, उनसे कुशन, सजावटी सामान आदि बनाने का काम करती हैं.

महिलाओं के लिए क्या है केंद्र सरकार का प्लान?
इसी वर्ष अप्रैल माह में ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (SHG) से जोड़कर उनकी सालाना आय बढ़ाने के लिए ‘मिशन 1 लाख’ की शुरुआत की गई थी. इसमें पंचायतों से सशक्तिकरण, सार्वजनिक भागीदारी, पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से जन कल्याण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था. वहीं, नगर निगम में भी स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक लाभ दिया जाता है, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें.

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