नौकरी का मोह छोड़ 3 भाइयों ने शुरू किया चाय का कारोबार, देश ही नहीं विदेशों में बढ़ी मांग

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रिपोर्ट- विजय उपरेती

पिथौरागढ़. कहते हैं जहां चाह वहां राह, इस कहावत को सही साबित किया है पिथौरागढ़ के तीन भाइयों ने. एमटेक, बीबीए और इंजीनियरिंग कर चुके तीनों भाइयों ने उत्तराखंड के उत्पादों से चाय का कारोबार शुरू किया. आज देखते ही देखते इनकी चाय की डिमांड देशभर ही नहीं बल्कि विदेश में भी हो रही है.

सुमित,अमित और देवेश जोशी तीनों सगे भाई हैं. तीनों भाईयों ने एमटेक, बीबीए और इंजीनियरिंग की शिक्षा ली है. मगर प्रोफेशनल एजुकेशन लेने के बाद इन तीनों ने नौकरी के बजाय अपना काम शुरू किया. तीनों भाइयों ने पिथौरागढ़ में हर्बल चाय का कारोबार शुरू किया. सुमित बायोटेक्नोलॉजी में एमटेक कर चुके हैं. इसलिए पहाड़ के हर्बल की उन्हें अच्छी जानकारी है. मिस्टर हब्ज नाम से तीनों भाईयों की टी की डिमांड भारत के साथ-साथ विदेशों में भी हो रही है.

युवा चाय उत्पादक सुमित जोशी का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में एक से बढ़कर एक हर्बल है. लेकिन इनका यूज स्थानीय स्तर पर कम होता है. बाहर के लोग पहाड़ के हर्बल का यूज करते हैं और तैयार उत्पाद को यहीं के बाजार में बेचते हैं. लेकिन उन्होंने यहीं के हर्बल को यहीं यूज किया है.

कई बीमारियों में रामबाण है मिस्टर हब्ज
तीनों भाईयों ने मिलकर पहाड़ी उत्पादों से 7 प्रकार की ग्रीन टी और 3 तरह की कैमोमाइल टी और मसाला टी तैयार की है. मिस्टर हब्ज टी बनाने में पूरी तरह के पहाड़ के हर्बल यूज हो रहे हैं. शंखपुष्पी, हल्दी, त्रिफला, ब्लूबेरी, स्टार ऐनीज, रूइबोस, जिमनेमा, तुलसी और सिल्वेस्टर जैसे स्थानीय उत्पादों की मदद से टी तैयार हो रही है. ये चाय पूरी तरह से नेचुरल होने के कारण कई बीमारियों के लिए रामबाण भी है.

मिस्टर हिब्ज टी की डिमांड उत्तराखंड और कई प्रदेशों में है. यही नहीं जर्मनी में भी तीनों भाई मांग के मुताबिक चाय भेज रहे हैं, जबकि लोकल लेबल पर हर रोज दो सौ से अधिक पैकेट आसानी से बिक रहे हैं. इन युवाओं द्वारा तैयार चाय अमेजन पर भी मौजूद है. आने वाले दिनों अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म में भी इसे बेचे जाने की तैयारी चल रही है.

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