बिना शिनाख्त के शव को जलाया, तो SSP ने दारोगा समेत 3 पुलिसकर्मियों को सुनाई जलती चिता देखने की अनोखी सजा

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रिपोर्ट- पुलकित शुक्ला

हरिद्वार. हरिद्वार एसएसपी अजय सिंह ने आत्महत्या करने वाले शख्स की शिनाख्त नहीं कराकर अज्ञात लाश के तौर पर अंतिम संस्कार कराने वाले पुलिसकर्मियों को अनोखी सजा सुनाई. एसएसपी ने एक दारोगा और दो पुलिसकर्मियों को दो दिनों तक श्मशान घाट में खड़े रहकर ड्यूटी देने का आदेश दिया. एसएसपी के आदेश के बाद तीनों पुलिसकर्मी हरिद्वार के तीन अलग-अलग श्मशान घाटों में खड़े रहकर जलती हुई चिताओं को देख रहे हैं. पुलिसकर्मियों के कारण मृतक के परिजन उसका अंतिम संस्कार करने से वंचित रह गए. पुलिसकर्मियों को इस गलती का पश्चाताप हो इसलिए एसएसपी ने ये सजा सुनाई है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल हरिद्वार जिले की गंगनहर कोतवाली में गुरमीत नाम की महिला ने अपने पति हरीश चांदना के गुमशुदा होने की जानकारी दी थी. सूचना के कुछ दिनों बाद पुलिस ने महिला की शिकायत पर गुमशुदगी का केस दर्ज किया. इस दौरान पुलिस को रेलवे लाइन पर एक व्यक्ति का शव भी मिला, जिसकी शिनाख्त नहीं होने पर पुलिसकर्मियों ने अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया.

शिकायतकर्ता महिला को जब इसकी जानकारी मिली तो उसने बताया कि जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार लावारिस समझकर किया गया. वह उसका गुमशुदा पति हरीश चांदना था. मामला सामने आने के बाद एसएसपी ने एसपी देहात एसके सिंह को मामले की जांच सौंपी. जांच में दारोगा नवीन सिंह और दो सिपाही चेतन और संतोष की लापरवाही सामने आई.

संवेदनशीलता से काम करें पुलिस

एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि दो दिन श्मशान घाट में खड़े रहकर ड्यूटी करने के आदेश देने के पीछे का उद्देश्य पनिशमेंट देना का नहीं है, बल्कि संवेदनशीलता का बोध कराना है. एसएसपी ने कहा कि पुलिसकर्मियों को मानवीय पहलू और संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर ड्यूटी करनी चाहिए. भविष्य में इस तरह की गलती ना दोहराए, इसलिए पुलिसकर्मियों को यह आदेश दिया गया.

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