मिसाल! गया के इस युवक ने 29 की उम्र में 44 बार किया रक्तदान, जानें पीछे की भावुक कहानी…

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गया: रक्त की कमी के चलते देश में हर साल लाखों लोगों की असमय मौत हो जाती है. लेकिन समाज में आज भी कई ऐसे लोग हैं जो दूसरे के सुख दुख में भागीदार बनने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं. एक ऐसे ही रक्त वीर बिहार के गया जिले के रहने वाले हैं, जिन्होंने 29 वर्ष की उम्र में 44 बार रक्तदान कर दर्जनों लोगों की जान बचाई है. जिले के शेरघाटी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत दखिन खाप गांव के रहने वाले नीरज कुमार की, जिन्होंने 18 वर्ष के उम्र से रक्तदान की शुरुआत की और 29 वर्ष की उम्र में 44 बार रक्तदान कर चुके हैं. इनके रक्तदान करने के पीछे कई कहानियां है जो दिल को छू लेगी.

बहन की मौत ने रक्तदान के लिए किया प्रेरित
दरअसल, जब नीरज 10 की पढ़ाई कर रहे थे तब उनकी बड़ी बहन की तबीयत खराब हो गई और उन्हें रक्त की जरूरत थी. लेकिन समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण उनकी बहन की मौत हो गई थी. जिसके बाद उन्होंने ठाना कि रक्त की कमी के कारण किसी और की मौत न हो जाए, इसलिए रक्तदान की शुरुआत की और अपने साथ कई सदस्यों को जोड़कर इस काम में जुड़ गए.

2011 से कर रहे हैं रक्तदान
2011 से नीरज रक्तदान के काम में जुड़ गए और समाज सेवा करने लगे. समाज सेवा के क्षेत्र में बेहतर काम करने का फल इन्हें 2017 में मिला. जब इनका चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए किया गया. तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार इस काम में जुटे हुए हैं और हर 90 दिन पर रक्तदान करते हैं. 2018 में इनका चयन वर्ल्ड टूर के लिए किया गया था. इसमें उन्होंने कई देश का भ्रमण किया है.

10 हजार से अधिक लोगों को दी नई जिंदगी
नीरज और उनके टीम के द्वारा किए गए रक्तदान से अब तक 10 हजार से अधिक लोगों की जान बचाया जा चुका है. इसमें से कई लोग उनके गांव तथा आस-पास के रहने वाले भी है. सगाहीबाजार के रहने वाले संत कुमार बताते हैं कि चार माह पूर्व उनकी बहू को रक्त की जरूरत थी, तो नीरज ने 2 बजे रात को आकर रक्तदान किया. जिसके बाद बहू को नई जिंदगी मिली. वहीं डॉ. एस के सिंह बताते हैं पटना एम्स में उनकी मां का ऑपरेशन था और दो यूनिट ब्लड की जरूरत थी तो नीरज जी ने मदद की थी. नीरज जी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और दुआ करते हैं ऐसे ही लोगों की जान बचाते रहे.

44 बार ब्लड और दो बार प्लेटलेट्स किया डोनेट
नीरज कुमार नेन्यूज 18 लोकल को बताया कि 2011 में एनएसएस से जुड़कर रक्तदान का काम शुरू किया. तब से हर 90 दिन पर ब्लड डोनेट करते हैं. अभी तक 44 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं. जिसमें 2 बार प्लेटलेट्स डोनेट किया है. उन्होंने बताया कि ब्लड की कमी के कारण उनकी बहन का देहांत हो गया था और परिवार के लोग भी ब्लड डोनेट नहीं किए थे. पिछले 11 सालों से इस काम में जुटे हुए हैं और अपने टीम के माध्यम से 10 हजार से अधिक लोगों की जान बचा चुके हैं. हम चाहते हैं कि आने वाले दिनों में किसी की भी मौत रक्त के अभाव में न हो इसके लिए निरंतर प्रयासरत है.

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FIRST PUBLISHED : November 18, 2022, 10:45 IST