राजस्थान: विदेशी पावणों ने बनाए चाक पर मिट्टी के बर्तन, छाछ-राबड़ी की मनुहार से हुए अभिभूत

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हाइलाइट्स

ग्रामीण लोक-कला के बारे में सैलानियों को जागृत करने से गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे
ऐतिहासिक 84 खंभों की छतरी पर लोक कलाकारों द्वारा नाट्य मंचन और आतिशबाजी के नजारे

बूंदी. छोटी काशी बूंदी में आयोजित हो रहे 27वें तीन दिवसीय बूंदी महोत्सव (Bundi Mahotsav) में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में तीसरे दिन देशी-विदेशी सैलानियों (Tourists) के लिए सर्किट हाउस से ठीकरदा गांव के लिए विलेज सफारी (Village safari)  का आयोजन किया गया. इस दौरान खुली जीपों में सवार होकर ठीकरदा गांव पहुंचे विदेशी सैलानियों का गांव के लोगों ने देशी व्यंजनों छाछ-राबड़ी द्वारा मान-मनुहार कर गर्मजोशी से स्वागत-सत्कार (Welcome) किया. लोक वाद्य यंत्रों के बीच नाचते गाते कलाकारों के साथ शोभायात्रा के रूप में निकले देशी-विदेशी सैलानियों का गांव के लोगों ने पलक-पावड़े बिछाते हुए स्वागत किया. उन पर पुष्प वर्षा कर अतिथि देवो भव परम्परा का निर्वहन किया.

देशी-विदेशी सैलानियों का समूह गांव में एक कुम्हार परिवार के घर पहुंचा. सैलानियों ने कुम्हार परिवार को चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते हुये देख स्वयं हाथ अजमाते हुए मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रयास किया. जिसमें कुछ हद तक उनके सफल होने से रोमांचक बने माहौल के बीच वे ठीकरदा गांव के लोगों के रहन-सहन, खान-पान और वहां की ग्रामीण कला संस्कृति से रुबरु हुए.

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ठीकदरा में विलेज सफारी का जमकर लुत्फ उठाया
इस दौरान राजस्थानी परिधानों में सजे-धजे लोक कलाकारों द्वारा गांव में प्रस्तुतियां दिये जाने से राजस्थानी परिवेश से सराबोर होकर देशी-विदेशी सैलानियों ने ठीकदरा गांव भ्रमण का जमकर लुत्फ उठाया.  ग्रामीण क्षेत्रों में समाप्त होते जा रहे रोजगार के साधनों के चलते गांव के लोगों द्वारा शहर की ओर किये जा रहे पलायन को रोकने और देशी-विदेशी सैलानियों को विलेज सफारी कराने के कार्यक्रम की सभी ने तारीफ की.

स्वागत-सत्कार से विदेशी पावणे हुए अभिभूत
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे ही प्रयासों से ग्रामीण कला के विषय में सैलानियों को जागृत कर गांव में रोजगार के अवसर पैदा होंगे. जिला प्रशासन द्वारा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करते रहना चाहिए. इस दौरान शोभायात्रा में नाच-गाकर विदेशी पावणों का स्वागत किया गया. गांव के लोगों द्वारा किए गये अभूतपूर्व स्वागत-सत्कार के चलते अभिभूत हुए सैलानियों ने गांव के लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए ग्रामीण कला संस्कृति की खुले दिल से प्रशंसा की.