सरदारशहर उपचुनाव: कांग्रेस ने अनिल शर्मा तो BJP ने अशोक पिंचा पर खेला दांव, क्या RLP से बढ़ेगी मुश्किल?

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हाइलाइट्स

सरदारशहर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामाकंन दाखिल करने का काम पूरा.
सरदार शहर विधानसभा में एक साल के लिए 2 लाख 89 हजार 579 मतदाता चुनेंगे अपना विधायक.
मुकाबला रोचक हो गया है क्योंकि 2018 के चुनाव में आरएलपी यहां पर तीसरे स्थान पर रही थी.

रिपोर्ट- सुधीर कुमार शर्मा
चूरू. राजस्थान के चूरू जिले की सरदारशहर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामाकंन दाखिल करने का काम पूरा हो चुका है. अब सरदार शहर के 2 लाख 89 हजार 579 मतदाता अपना विधायक चुनेंगे. कांग्रेस से अनिल शर्मा तो भाजपा से अशोक पिंचा चुनावी मैदान में हैं. उपचुनाव के लिए 5 दिसंबर को मतदान होगा. सरदार शहर उपचुनाव की 8 दिसंबर को मतगणना  होगी.

एक साल के कार्यकाल के लिए हो रहे इस उपचुनाव में कांग्रेस ने दिवंगत विधायक भंवर लाल शर्मा के पुत्र अनिल शर्मा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है. वहीं, भाजपा ने साल 2018 में प्रत्याशी रहे अशोक पिंचा पर दांव खेला है. कहने को तो कांग्रेस और भाजपा की सीधी टक्कर है, लेकिन आरएलपी ने और माकपा ने भी अपना-अपना प्रत्याशी मैदान में उतार दिया है.

हालांकि, सहानुभूति के आधार पर और कांग्रेस का गढ़ मानी जानी वाली सीट के आधार पर जीत की अधिक संभावना कांग्रेस की बताई जा रही है. लेकिन, आरएलपी ने अपना प्रत्याशी लालचंद मुंड को बनाया है जिस वजह से मुकाबला रोचक हो गया है. यह इसलिए कि 2018 के चुनाव में आरएलपी यहां पर तीसरी स्थान पर रही थी.

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सरदार शहर सीट पर हो रहा है  तीसरी बार उपचुनाव  
1952 से लेकर साल 2022 के बीच विधानसभा के आम चुनावों के साथ में यहां पर तीसरा उपचुनाव होने जा रहा है. इससे पहले सातवीं विधानसभा दौरान रिक्त हुई सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के केसरी चन्द बोहरा ने  जीत दर्ज की थी. इसके बाद 10वीं विधानसभा के दौरान कांग्रेस के नरेन्द्र बूढानिया लोकसभा में निर्वाचित होने के बाद खाली हुई सीट पर जनता दल की टिकट पर भंवर लाल शर्मा ने जीत दर्ज की थी. इसके बाद हुए चुनावों में भंवर लाल शर्मा कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा करते थे.

एक साल के लिए 2 लाख 89 हजार 579 मतदाता चुनेंगे अपना विधायक
सरदार शहर में हो रहे उपचुनाव के लिए 2 लाख 89 हजार 579 मतदाता अपना विधायक एक साल के लिए चुनेंगे. इनमें से एक लाख 52 हजार 640 पुरुष मतदाता और एक लाख 36 हजार 935 महिला मतदाता हैं. इन उपचुनावों में 497 सर्विस मतदाता भी हैं. सामान्य मतदाता एवं सर्विस मतदाता मिलाकर कुल 2 लाख 90 हजार 76 मतदाता हैं. इस चुनाव के लिए सरदार शहर विधानसभा क्षेत्र में 295 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.

जाट, एससी, एसटी, ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाताओं का है वर्चस्व
2 लाख 89 हजार 579 मतदाता  वाले सरदार शहर विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट जाट समुदाय से आते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में  जाटों के 70 हजार से ज्यादा वोट है, जबकि दूसरे स्थान पर एससी वोट आते हैं. जिनके वोटों की संख्या करीब 55,000 बताई जाती है. इस विधानसभा क्षेत्र में  ब्राह्मण वोटर करीब 45 हजार के आसपास बताए जाते हैं. करीब 23,000 मुस्लिम वोटर और राजपूत – बीस हजार हैं. माली दस हजार हैं तो आठ हजार कुमावत समाज के आते हैं. इसके अलावा इतने ही स्वामी और सोनी सुथार समाज के हैं. व्यवसाय से तालुक रखने वाले समाज  से करीब 18 हजार वोटर हैं. अन्य जातियों के करीब 20 हजार वोट बताए जाते हैं. इतना जरूर है कि वोटों के समाजिक गणित को देखें तो जाट समाज का पलडा भारी है.

सरदार शहर सीट माना जाता है कांग्रेस का गढ़ 
15 में से केवल 2 चुनाव ही भाजपा ने जीते हैं. सरदार शहर सीट कांगेस का गढ़ मानी जाती है. इसकी वजह भी साफ है कि अब तक हुए विधानसभा चुनावों में 15 चुनाव से भाजपा 2 बार ही जीत पाई है. 1951 से लेकर 2018 तक सरदारशहर विधानसभा सीट पर हुए 15 चुनाव हुए हैं, जिसमें 1980 और 2008 में ही भाजपा जीत पाई है. कांग्रेस के उम्मीदवारों ने 15 में से 9 चुनाव सरदार शहर सीट पर जीते हैं. दिवंगत भंवर लाल शर्मा 6 और चंदनमल बैद 4 बार सरदारशहर से विधायक रहे, भंवरलाल शर्मा चार बार कांग्रेस एक बार लोकदल और एक बार जनता दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. जनता दल, लोकदल, जेएनपी और एक बार निर्दलीय भी रह यहां से चुनाव जीत चूके हैं.

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