स्वास्थ्य सेवा बदहाल: पिथौरागढ़ में इलाज न मिलने के कारण 14 साल की अनाथ रेनू की मौत, जानें मामला

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रिपोर्ट: हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने एक और जिंदगी छीन ली. वह भी उस बेटी की जिस पर पहले से ही किस्मत ने कहर बरपाया था. पिथौरागढ़ के थल क्षेत्र की रहने वाली 14 साल की अनाथ रेनू पानू की टायफाइड की बीमारी के चलते हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में मौत हो गई. हैरानी की बात यह है कि रेनू की टायफाइड जैसी बीमारी का इलाज पिथौरागढ़ से लेकर हल्द्वानी तक नहीं हो पाया. कुछ साल पहले रेनू के माता-पिता की मौत हो गई थी. जिसके बाद वह यहां निराश्रित बच्चों के लिए खोली गई कॉर्ड संस्था में रह रही थी. रेनू के दो भाई हैं, जो अपने रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं.

कॉर्ड संस्था से मिली जानकारी के अनुसार, रेनू पानू 2019 से कॉर्ड संस्था पिथौरागढ़ में रह रही थी. थल क्षेत्र के मालाझूला गांव की रेनू पानू को 4 नवंबर से बुखार की शिकायत थी. जिसके बाद संस्था ने अपने संसाधनों से रेनू का इलाज कराया. 14 नवंबर को रेनू को फिर तेज बुखार आया, तो संस्था ने उसे पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया. यहां भर्ती होने के बाद पता चला कि रेनू का टायफाइड बिगड़ गया है. इस पर उसे 14 नवंबर की शाम जिला अस्पताल से हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया गया. इसके बाद एसटीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. रेनू का शव पोस्टमार्टम के बाद पिथौरागढ़ लाया गया, जहां बाल कल्याण समिति, कॉर्ड संस्था की देखरेख में उसका अंतिम संस्कार किया गया.

कॉर्ड संस्था के अध्यक्ष सुभाष पंगरिया ने बताया कि हमें रेनू की मौत का बहुत दुख है. वह काफी अच्छी और मिलनसार लड़की थी. उसकी मौत की खबर मिलने के बाद से संस्था से जुड़े सभी लोग स्तब्ध हैं. उन्होंने कहा कि रेनू को 14 नवंबर को पिथौरागढ़ जिला अस्पताल से हल्द्वानी हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया था. वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

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