Bihar News: सहरसा जिला अस्पताल में रस्सी से बांध कर रखते हैं फिजियोथेरेपी मशीन! जानें वजह

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रिपोर्ट- मो. सरफराज

सहरसा. बिहार के अस्पतालों को बेहतर बनाने के लिए मिशन मोड पर काम किए जाने का दावा किया जा रहा है. लेकिन कोसी प्रमंडल के सहरसा स्थित सदर अस्पताल में इसका पूरा असर देखने को नहीं मिल रहा है. यह जानकर आप भी चौक जाएंगे कि यहां के फिजियोथेरेपी विभाग में महंगे मशीनों को रस्सी के सहारे बांधकर रखा जाता है. जी हां! मोटी-मोती रस्सी के सहारे. यही नहीं, यहां कुछ भी ठीक नहीं है. इस कारण से फिजियोथेरेपी विभाग में इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है.

लोकल स्तर पर हुई थी फिजियो मशीन की खरीदारी
दरअसल, इसी साल 10 मई को सदर अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग का उद्घाटन किया था. उद्देश्य यह था कि लकवा समेत चोट-मोच, जॉइंट पेन आदि परेशानियों से जूझ रहे मरीजों को यहां इलाज मिल सके. इस विभाग की मशीनें और उपकरण जिला स्वास्थ्य समिति (DHS) की ओर से खरीदे गए थे. जाहिर सी बात है कि इन मशीनों की खरीदारी के लिए जिला में बनी DHS की कमेटी ने अप्रूवल दिया.DHSने ही स्थानीय संवेदक को फिजियोथेरेपी विभाग के सभी औजारों की खरीदारी का ठेका दे दिया था. जिसके बाद मेडिकल इक्विपमेंट सप्लाई करने वाले संवेदक ने सभी औजारों की आपूर्ति की थी.

यह मशीन पड़े हुए हैं खराब
फिजियोथैरेपी विभाग में दो ट्रेक्शन मशीन मशीन खराब है. वहीं, दो आईएफटी, दो टेन्स पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है. जबकि एक एसी भी बंद पड़ा हुआ है. इसके अलावा कई अन्य जरूरी उपकरण पहले से नहीं है. इनमेंलेजर, सोल्डर गाडील, पैररल वार, एक्सरसाइजर, पाराफिंग बैक वाथ, मशल एक्सट्रोमेटल, हाइड्रो क्यूलेटर, एंकल सहित अन्य उपकरण शामिल हैं.

पहले आते थे हर रोज 25-30 मरीज, अब आते हैं मात्र 7-8
सहरसा सदर अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में चिकित्सक के रूप में डॉ. अरुण कुमार, डॉ. आसिफ रजा और डॉ. युक्ताश्री नियुक्त हैं. ये लोग कहते हैं कि हमलोग अपने स्तर से मरीजों का भरपूर इलाज करने का प्रयास करते हैं. लेकिन खराब पड़े औजारों के कारण मरीजों को अधिक लाभ नहीं मिल पा रहा है.
यही कारण है कि 10 मई को हुए उद्घाटन के बाद से आज तक कुल 2300 मरीजों का इलाज किया गया. पूर्व में यहां प्रतिदिन 25-30 मरीज आते थे, जो घटकर अब 7-8 पर पहुंच गया है.

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