Deoghar: मां बुढ़ेश्वरी को नया फसल चढ़ाने के साथ शुरू होगा बुढ़ेई नवान्न मेला, जानें मान्यता…

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परमजीत कुमार

देवघर. झारखंड के देवघर के देवीपुर व मधुपुर प्रखंड के बीचों बीच बुढ़ेई पहाड़ पर स्थापित मां बुढ़ेश्वरी के दरबार में 28 नवंबर से 30 नवंबर तक मेला का आयोजन किया जा रहा है. इस सालाना मेला की तैयारी अंतिम दौर में है. प्रत्येक साल अगहन (हिंदू कैलेंडर का महीना) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पहाड़ पर विशाल मेला लगता है. इस मेले में जिले भर से लोग शिरकत करने आते हैं. झारखंड के अलावा बिहार व पश्चिम बंगाल से व्यापारी यहां दुकान, तारामाची, झूला, मौत का कुंआ सहित कई तरह के छोटे झूले लगाने के लिए पहुंचते हैं.

मान्यता है कि अगहन मास में नए फसल की कटाई के बाद इस क्षेत्र के लोग उसे सबसे पहले मां बुढ़ेश्वरी के चरणों में चढ़ाते हैं. उसे बाद ही यह उसे ग्रहण करते हैं. इसलिए इसे नवान्न मेला भी कहा जाता है. मेले की तैयारी में जुटे गोविंद सिंह, नवीन, सिंह, रणवीर सिंह, पवन सिंह व धीरज सिंह ने बताया कि तीन दिन तक चलने वाले मेले में तीनों दिनों का अलग-अलग महत्व होता है. 28 नवंबर को दही-चूड़ा, 29 नवंबर को पहाड़ मेला व 30 नवंबर को गली मेला लगेगा. कोरोना महामारी के कारण पिछले दो साल से मेला नहीं लग रहा था, लेकिन इस बार भव्य आयोजन किया जा रहा है. इसे लेकर इलाके के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.

मंदिर प्रांगण में है मानसरोबर
बुढ़ेई मंदिर प्रांगण में एक प्राकृतिक सौंदर्य मानसरोवर है. इसके अलावा, एक ही चट्टान पर सात पर्वत श्रृंखलाएं हैं. उसमें पहाड़ की उच्च चोटी पर मां बुढ़ेश्वरी माता का मंदिर है. दूसरी ओर मां तिलेश्वरी का मंदिर है. इस पहाड़ पर हाथी, घोड़ा व अन्य कई जानवारों के पैरों के निशान आज भी मौजूद हैं. जिले में इसको लेकर कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं.

प्रत्येक मंगलवार को यहां श्रृंगार पूजा होती है जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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