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Tuesday, January 31, 2023
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    Detail Review: सच की कड़वाहट को झेलने की हिम्मत रखते हैं तो जरूर देखिए ‘बेन स्टोक्स: फीनिक्स फ्रॉम द एशेज’

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    Detail Review ‘Ben stokes: Phoenix from the ashes’: कहा जाता है कि यदि आप अपने आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रखेंगे, रोज़ाना एक्सरसाइज करेंगे, कोई खेल खेलेंगे और लोगों से मिलते रहेंगे तो आपको डिप्रेशन होने की संभावनाएं नहीं के बराबर होती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में कई खिलाडियों ने ये बताया है कि मेंटल हेल्थ का खेल से कोई रिश्ता नहीं हैं. भारत में मेंटल हेल्थ को अभी भी गम्भीरता से नहीं लिया जाता. साल 2014 में भारत की क्रिकेट टीम इंग्लैंड गयी थी. नौजवान विराट कोहली को ये दौरा बहुत बुरी तरह याद है. स्टंप्स से बाहर जाने वाली हर बॉल, विराट कोहली का विकेट ले उड़ती थी. पूरे दौरे में विराट बुरी तरह फ्लॉप रहे.

    क्रिकेट खेलने वालों के लिए इंग्लैंड में अच्छा खेलना ज़रूरी है. विराट इस दौरे के बाद भयावह निराशा के चंगुल में थे. ना वो अपना परफॉर्मेंस ठीक कर पाए और उन्हें अपने क्रिकेटर होने पर भी शक होने लगा था. एक प्रतिभावान खिलाड़ी को हार बर्दाश्त नहीं होती. पिछले कुछ सालों में विराट पुनः अपनी मानसिक स्थिति से जूझ रहे हैं. कारण कुछ भी हो लेकिन विराट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सेंचुरी लगाए हुए करीब करीब 3 साल हो चुके है. टी 20, वन डे और टेस्ट क्रिकेट में विराट का बैटिंग एवरेज, बड़े बड़े धुरंधरों का नहीं होता.

    विराट तीनों ही फॉर्मेट में भारत के सफलतम कप्तानों में गिने जाते हैं. राजनीति की गोट ऐसी चली गयी कि उनसे पहले टी 20 और फिर वन डे की कप्तानी ले ली गयी. टेस्ट की कप्तानी से वे खुद दूर चले गए. राजनीति का असर उनके खेल पर पड़ा. 2022 में अगस्त के महीने में जाकर वे अपना फॉर्म वापस पा सके थे. शतक अब भी उनसे दूर है. 70 अंतर्राष्ट्रीय शतकों के बाद विराट का बल्ला शतक को तरस गया. उनकी प्रतिभा, उनका परिश्रम, उनका हुनर, उनकी तैयारी या उनके इरादों में संदेह नहीं लेकिन मानसिक शक्ति का जो ह्रास उनके साथ हुआ है उसका अंदाजा सिर्फ उन्हीं को है.

    विराट कोहली की प्रिय गाली से मिलता जुलता नाम रखने वाले इंग्लैंड के बेहतरीन क्रिकेटर बेन स्टोक्स की ज़िंदगी के संकटों से जूझते-जझते बनी मानसिक स्थिति को दर्शाती हुई डाक्यूमेंट्री “बेन स्टोक्स: फ़ीनिक्स फ्रॉम द एशेज” हाल ही में अमजन प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई है. सच की कड़वाहट को झेलने का माद्दा रखते हैं तो इस डाक्यूमेंट्री को ज़रूर देखिये. मन के माने जीत पाने का ऐसा जीवट बेन स्टोक्स की ज़िंदगी का सबसे अहम हिस्सा है.

    इंग्लैंड के क्रिकेटर बेन स्टोक्स आज क्रिकेट की दुनिया का ऐसा नाम है जिसके मैदान पर आते ही विरोधी टीम के दिल में दहशत और दर्शकों के मन में रोमांच जन्म ले लेता है. न्यूज़ीलैंड में जन्मे बेन के पिता रग्बी टीम के कोच थे और मां ब्रिटिश थीं. 12 साल के बेन इंग्लैंड आ गए जब उनके पिता को इंग्लैंड में एक रग्बी टीम के कोच बनने के मौका मिला. कॉकरमाउथ जैसे एक छोटे से कस्बे में बेन ने क्रिकेट सीखना और खेलना शुरू किया. बेन की प्रतिभा ने उन्हें जल्द ही स्कूल क्रिकेट से लेकर क्लब क्रिकेट और फिर जल्द ही इंग्लैंड की नेशनल क्रिकेट में जगह मिल गयी.

    दुनियाभर की क्रिकेट लीग में खेलते-खेलते बेन का सिक्का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जम गया. 2017 में बेन को इंग्लैंड का उपकप्तान बनाया गया और उसी दिन बेन के मित्र जो रूट को इंग्लैंड का कप्तान बनाया गया था. बेन ने दुनियाभर में अपनी बैटिंग, बोलिंग और फील्डिंग से इंग्लैंड की टीम को नयी ऊंचाइयों पर पहुंचाया. छोटे से कस्बे से आया बेन एक दिन प्रसिद्धि का शिकार हो गया.

    सितम्बर 2017 में इंग्लैंड के शहर ब्रिस्टल में एक नाइट क्लब के बाहर कुछ लोगों ने बेन के दो गे दोस्तों पर ताने मारना शुरू किये जो कि जल्द ही हाथापाई में बदल गया. बेन ने भी शराब पी रखी थी लेकिन अपने दोस्तों की बेइज़्ज़ती और मारपीट से बेन का खून खौल उठा. उसने उन लड़कों को धक्का दिया, झगड़ा बढ़ गया और बेन ने एक लड़के को घूंसा मार दिया. पुलिस आ गयी, बेन गिरफ्तार हो गया और ये केस अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया. बेन क्रिकेट से दूर कर दिए गए. कई महीनों तक बेन को इंग्लैंड टीम से बाहर रखा गया. केस का फैसला जब आया और बेन बरी भी हो गया लेकिन बेन के दिमाग पर इस पूरी घटना का बहुत बुरा असर पड़ा.

    मीडिया ट्रायल की वजह से बेन और उसके परिवार को बहुत कुछ झेलना पड़ा और बेन को क्रिकेट से नफरत हो गयी. बेन के मित्रों जैसे स्टुअर्ट ब्रॉड या जो रूट ने उन्हें बहुत सम्बल दिया. क्रिकेट से हुई नफरत के बावजूद बेन ने अपने आप के लिए फिर से अपने आप को झोंक दिया और इंग्लैंड क्रिकेट को उनकी एहमियत मालूम थी इसलिए उन्हें फिर से इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया गया और बेन ने इसके बाद हर मैच में अपनी एहमियत साबित की. 2019 में इंग्लैंड को क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम में बेन सबसे बड़े हीरो बन के उभरे. बेन इसके बाद सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे थे की उनकी ज़िंदगी में उन्हें एक और झटका दिया.

    बेन के पिता को अचानक पता चला कि उन्हें कैंसर है और उनकी बीच की ऊंगली काटनी पड़ी थी. कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो अमूमन ख़त्म नहीं होती. धीरे धीरे कैंसर फिर फैला और बेन की ज़िन्दगी में फिर उथल पुथल होने को तैयार खड़ी थी. दिसंबर 2020 में बेन के पिता की मृत्यु हो गयी. बेन अपने पिता की देखभाल करने के लिए एक डेढ़ महीना अपने माता पिता के पास न्यूज़ीलैंड शिफ्ट हो गए थे. बेन को बचपन से क्रिकेट का चैंपियन बनाने वाले उनके पिता का साया उनके सर पर नहीं रहने से बेन को बहुत गहरा सदमा पहुंचा.

    बेन को 2021 में इंग्लैंड की क्रिकेट टीम का कप्तान बनना पड़ा क्योंकि लगभग पूरी टीम के सदस्य कोविड के शिकार हो गए थे. कप्तानी पाने के कुछ महीने बाद ही बेन अपने मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से परेशान हो गए. उन्हें पैनिक अटैक आने लगे, वो अपना आप खोने लगे, बिना बात के गुस्सा आने लगा, चिड़चिड़े हो गए. बेन ने कहा कि जब आप क्रिकेट खेलने जाते हैं, अपने होटल रूम में अकेले रहते हैं तो आपको एहसास होता है कि आपके साथ आपका अपना कोई है ही नहीं. आप अकेले हैं. ये अकेलापन बेन को सालने लगा और जुलाई 2021 से बेन ने क्रिकेट से लम्बी छुट्टी का ऐलान कर दिया.

    बेन स्टोक्स : फ़ीनिक्स फ्रॉम द एशेज डाक्यूमेंट्री में सैम मेंडेस द्वारा लिया गया बेन स्टोक्स का इंटरव्यू बड़ी प्रमुखता से ये दिखाता है कि जितनी ऊंचा किसी का कद होगा उसको उतना ही अकेलेपन का एहसास होता होगा. बेन के पास सब कुछ है, प्रतिभा है, खेल है, प्रसिद्धि है, क्रिकेट और विज्ञापनों से मिलने वाला भरी भरकम पैसा है, परिवार भी है लेकिन ये सब उनका अकेलापन दूर नहीं कर पा रहे हैं. बेन क्रिकेट खेलने लौट आये हैं. बेन फिर से मैदान पर करिश्मा दिखाने लगे हैं लेकिन बेन का अकेलापन अब उनके परिवारवाले और उनके दोस्त भी दूर नहीं कर पा रहे हैं. मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी समस्या है जिसकी स्वीकृति ही नहीं है भारत में.

    हम कभी ये मानने को तैयार ही नहीं होते की ज़िंदगी की उतार चढ़ाव, आसपास का परिवेश, जाने अनजाने लोगों का आपके प्रति बर्ताव, और कई सारी बाते हैं जो आपकी सोच पर प्रभाव डालती हैं और कई बार ये प्रभाव आपके भले के लिए नहीं होता. शेर बच्चा शेर बच्चा, लड़का होके रोता क्यों है, तुम लड़की हो समझना चाहिए, लड़के तो ऐसे ही होते हैं जैसे जुमलों की वजह से हम कभी सच स्वीकार नहीं करते. मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या है. बेन स्टोक्स : फ़ीनिक्स फ्रॉम द एशेज की डाक्यूमेंट्री देख कर ये समझना और आसान हो जाता है. कई खिलाडी इसकी चपेट में आ चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर ग्लेन मैक्सवेल, जापान की टेनिस खिलाडी नाओमी ओसाका की मानसिक स्थितियों से हम सब वाकिफ हैं. जो लोग ये कहते हैं कि हर बात दिल से नहीं लगाते, उन्हें ये डाक्यूमेंट्री देख कर समझ आएगा कि बात दिल की है ही नहीं, दिमाग की है.

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    Tags: Ben stokes, Film review

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