Indian Idol में गा चुका, सुरेश वाडेकर के घर जा चुका, अब क्यों सड़क पर गाने को मजबूर है यह दिव्यांग?

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रिपोर्ट – कैलाश कुमार

बोकारो. शहर के दिव्यांग मोहम्मद मकसूद का सड़क पर गाना गाते वीडियो खूब वायरल हो रहा है. वह 2017 में इंडियन आइडल के स्टेज पर परफॉर्म कर चुका है. लेकिन इन दिनों घर चलाने के लिए सड़क किनारे गाने गाकर लोगों को इंटरटेन कर रहा है. उसके गाने सुनकर वहां मौजूद लोग आर्थिक सहयोग करते हैं, इस तरह उसके परिवार का भरण पोषण हो पाता है. पांच साल पहले बड़े मंच से गाने के बावजूद घर की आर्थिक तंगी के हालात से मजबूर होकर मकसूद को अपनी कला इस तरह बेचनी पड़ रही है.

गोमिया प्रखंड के झरकी का रहने वाला मोहम्मद मकसूद दोनों पैरों से दिव्यांग है. जो भी उसे सुनता है, कहता है कि गले में सरस्वती का वास है. बचपन से ही गाने वाले मक्सूद को इन दिनों मजबूरी में गाना पड़ता है. मकसूद ने न्यूज़18 लोकल को बताया कि वह 2017 में इंडियन आइडल के 24वें राउंड तक पहुंचा था. उसके बाद शो के मेंटर सुरेश वाडेकर उसे अपने घर ले गए. वहां उसने वाडेकर से गायकी के और भी गुर सीखे लेकिन कोरोना काल में उसे मुंबई से घर भेज दिया गया. अब वाडेकर से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

सड़क किनारे गाने की मजूबरी
मकसूद ने बताया कि घर पर पत्नी और दो साल का बेटा है. माता-पिता भी साथ रहते हैं. सभी की ज़िम्मेदारी उसके ऊपर है. परिवार के भरण पोषण के लिए सड़क किनारे गाने को मजूबर मकसूद को इससे रोज़ाना 500-1000 रुपये मिल जाते हैं. कभी-कभी 1500-2000 रुपये तक भी जुट जाते हैं.

मकसूद ने परिवार के भरण पोषण के लिए सीएम हेमंत सोरेन से एक घर और नौकरी की मांग की है. वह दिव्यांगों के लिए संगीत अकादमी खोलना चाहता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें. मकसूद ने कहा सरकार से मदद मिली, तो वह बोकारो और झारखंड की पहचान बनने की काबिलियत रखता है.

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