Nainital: औषधीय गुणों की खान है पहाड़ की लाल मूली, फायदे जान रह जाएंगे दंग

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रिपोर्ट: हिमांशु जोशी

नैनीताल. आपने अक्सर लंबी सफेद मूली तो काफी जगह देखी होगी, लेकिन पहाड़ में मूली का आकार और उसका रंग काफी अलग और सबसे हटकर होता है. यहां गोल या फिर शंखाकार की मूली देखने को मिल जाएगी. इस मूली का रंग लाल और सफेद होता है. पहाड़ की मूली औषधीय गुणों से भरपूर होती है.

वैसे तो देशभर में लंबी मूली का ही सेवन किया जाता है. इसका सलाद या फिर पराठे बनाकर खाए जाते हैं. हालांकि पहाड़ की मूली को कई तरह से इस्तेमाल में लाया जाता है. पहाड़ी मूली यहां की शान है और इसके बिना पहाड़ की रसोई अधूरी सी है. केवल पहाड़ में ही मूली की सब्जी बनाकर भी खाई जाती है. इसमें आलू-मूली का थेचवा सबसे प्रसिद्ध है, जिसमें आलू और मूली को बराबर मात्रा में काट कर सिलबट्टे में थेच कर पकाया जाता है.

इसके अलावा मूली की सब्जी दही के साथ मिलाकर भी खाई जाती है. मूली को नींबू सानने के साथ भी इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि ज्यादातर मूली बरसात से लेकर जाड़ों के मौसम तक होती हैं, इसलिए इसे धोकर चिप्स के आकार में काटकर सुखाने के लिए रख दिया जाता है. ऐसा करने से इसे गर्मियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. मूली की जड़ ही नहीं बल्कि इसके पत्तों की भी सब्जी बनाकर खाई जाती है. इसके पत्तों से बनने वाली मूली की भुजिया हर पहाड़ी की पसंद है.

पोटेशियम से लेकर मौजूद हैं ये चीजें
पहाड़ की मूली औषधीय गुणों की भी धनी है. इसमें अलग-अलग तरह के मिनरल्स काफी मात्रा में पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, फाइबर, पोटेशियम, मैंगनीज और आयरन भी होता है. इसके पत्ते भी काफी गुणकारी होते हैं. इसके पत्ते लिवर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. पीलिया के मरीजों के लिए मूली के पत्तों की सब्जी रामबाण उपाय है.

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