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Friday, January 27, 2023
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    Naseeruddin Shah OTT debut is almost a flop show Kaun Banegi Shekharwati Read Review EntPKS

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    ‘Kaun Banegi Shekharwati’ Review: ज़ी5 देश का एक प्रख्यात ओटीटी चैनल है और उस पर कई सालों से एक से बढ़ कर एक फिल्म और वेब सीरीज आती रही हैं. अन्य भाषाओं में तो कॉन्टेंट फिर भी अच्छा है लेकिन हिंदी में कॉन्टेंट के चयनकर्ता संभवतः निर्माताओं का नाम देखकर ही आश्वस्त हो जाते हैं कि कॉन्टेंट तो बढ़िया ही होगा. पिछले कुछ समय से ज़ी5 की वेब सीरीज जैसे सुनील ग्रोवर की सनफ्लावर, दिव्येंदु शर्मा की बिच्छू का खेल या फिर कुणाल खेमू की अभय, एक भी सीरीज ऐसी नहीं है जिस को पूरी तरह से पका हुआ प्रोडक्ट माना जा सके. इस कड़ी में नसीरुद्दीन शाह अभिनीत पहली वेब सीरीज “कौन बनेगी शिखरवती” हाल ही में रिलीज़ की गयी.

    10 एपिसोड और करीब साढ़े 5 घंटे लम्बी इस वेब सीरीज में लगता है कि अब मज़ा आएगा अब मज़ा आएगा, लेकिन ये मज़ा आते-आते एपिसोड ही ख़त्म हो जाता है. बच्चों की तरह लिखी गयी इस वेब सीरीज में न तो नसीर जमे हैं और न ही लारा या सोहा या कृतिका. एक रघुवीर यादव के कुछ पलों को छोड़ दें और चाइल्ड आर्टिस्ट अलीशा खैरे को छोड़ दें तो पूरी की पूरी सीरीज एक बेहतरीन टाइम वेस्ट है.

    राजस्थान के राजे रजवाड़े अब काफी मॉडर्न हो चुके हैं. उनकी कुछ परम्पराओं को छोड़ दें तो अधिकांश राजकुमार अब फॉरेन में पढ़कर लौटे हैं, सब के सब किसी बिज़नेस में लगे हैं या फिर उन्होंने अपने किसी महल को हेरिटेज होटल में बदल कर उसका व्यवसाय शुरू कर दिया है. कोई भी राजकुमार या राजकुमारी अब फ़िल्मी या नकली नहीं रह गए हैं. कौन बनेगी शिखरवती में ये बात ठीक से कैद की गयी है, लेकिन जिस अंदाज़ में नसीरुद्दीन शाह को प्रस्तुत किया है उसको देख कर विचार आता है कि इस किस्म के कई किरदार नसीर पहले कर चुके हैं, फिर ये वाला फीका क्यों है. शिखरवती के राजा की भूमिका में नसीर असमंजस में लगते हैं.

    सीरीज की शुरुआत में वो एक मूर्ख और बौड़म किस्म के राजा बन के नज़र आते हैं जो हर बात के लिए अपने मित्र नुमा सेक्रेटरी रघुवीर यादव पर निर्भर हैं. जैसे-जैसे सीरीज आगे बढ़ती है, नसीर का किरदार हर एपिसोड में नए रंग लेकर आता है. ये समझना मुश्किल हो जाता है कि नसीर दरअसल बौड़म हैं या बौड़म होने का अभिनय कर रहे हैं. अपनी विरासत के लिए सही उत्तराधिकारी चुनने के लिए वो अपनी चार बेटियों (लारा, सोहा, कृतिका और अन्या) को उनकी ज़िन्दगी से उठा कर शिखरवती ले आते हैं.

    ये अलग बात है कि चारों बेटियों को अपनी निजी ज़िन्दगी से भागने की जल्दी होती है. मूर्खों की तरह नवरस पर आधारित गेम्स रखे जाते हैं और चारों बेटियां उस में हिस्सा लेकर अंक कमाती हैं. सबसे ज़्यादा अंक किसे मिलते हैं ये पता लगाने की कवायद में कई पात्र कहानी में घुसे आते हैं और फिर लापता भी हो जाते हैं. आखिर में क्या नसीर को उनका उत्तराधिकारी मिलता है, ये कहानी का अंत है लेकिन आपको पता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि दिखाना ज़रूरी भी नहीं है.

    नसीर को ओटीटी पदार्पण निहायत ही लचर है. इतनी कमज़ोर कथा और पटकथा पर नसीर ने कभी हामी नहीं भरी है. इस बार क्या हुआ है वो ही जाने. मिर्च मसाला के सूबेदार या हीरो हीरालाल के हीरालाल या भवनी भवाई के राजा चक्रसेन वाली भूमिकाओं को याद करें तो राजा मृत्युंजय शिखरवती की भूमिका को लगता है एनीमिया हो गया है. फ्लैशबैक के सीन्स में वो एक समझदार पिता और राजा की भूमिका में दिखाए गए हैं. पत्नी की मृत्यु के बाद बेटियों को बड़ा करने की ज़िम्मेदारी भी ठीक से निभाते हैं. इसके ठीक विपरीत, वर्तमान में वो एक विदूषक की तरह अभिनय करते हैं और आखिरी दो एपिसोड में एक संजीदा शख्स बन जाते हैं. नसीर के जीवन में किसी भी करैक्टर का ग्राफ इतने व्यर्थ तरीके से नहीं लिखा गया है.

    अनन्या बनर्जी और सिमरन साहनी (चंडीगढ़ करे आशिकी) ने मिलकर इस कॉमेडी वेब सीरीज को लिखा है. किरदारों को समझने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि समझ आएंगे नहीं. लारा दत्ता सबसे बड़ी बेटी बनी हैं जिन्होंने चुपचाप अपने क्लासमेट से शादी की और बच्चे पैदा किये हैं. उनके पति का बिज़नेस डूब जाता है, करोड़ों का क़र्ज़ हो जाता है और उसने एक अदद डॉन से पैसे उधार लिए हैं. कमाल ये है कि लारा का किरदार एक कंट्रोलिंग वाइफ का है और उसे इसकी भनक भी नहीं लगती. इस बात को कैसे माना जाए?

    दूसरी बेटी है सोहा जो एक नृत्य ग्राम में रहती है और नृत्य करती है. दो अलग-अलग प्रेमियों से उसके दो बच्चे हैं, पद्मा और धनुर. हंसने वाली बात ये है कि इनके नाम योग के आसनों पर रखे गए हैं. इनके नाम और इनके किरदारों में तारतम्य नहीं है. हालांकि दोनों ही बच्चों ने क्या बढ़िया अभिनय किया है. तीसरी बेटी बनी हैं कृतिका कामरा जो कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं और क्लिक्सटाग्राम पर उसे लाखों फॉलोवर्स हैं. उनकी छवि के ठीक विपरीत ये किरदार इतना कमअक्ल है कि उन्हें सामान्य सा मज़ाक भी समझ नहीं आता. चौथी बेटी अन्या सिंह गेम डिज़ाइनर हैं और कई बीमारियों से घिरी रहती हैं.

    पटकथा में ये समझाना ज़रूरी नहीं समझा जाता कि चारों बहनें जो आपस में बहुत प्यार से रहती हैं, उनकी मां उनके बीच की कड़ी है और उन्हें मिलजुल कर रहना सिखाती है, अचानक से एक दूसरे को नापसंद कैसे करने लगती हैं. अपने पिता द्वारा आयोजित एक भोज में चार्ली चैपलिन की तर्ज़ का हास्य जिसमें बाल रंगना, फ्रिज में बंद करना, वेटर को टक्कर लगने से कपड़ों पर शराब गिरना और शराब की बोतल उठाकर फेंकना जैसी बातों से कम से कम 18 साल साथ रही बहनों में इतना बड़ा झगड़ा कि वो घर छोड़कर चली जाती हैं? हज़म कैसे होगा. दर्शक भी इस बात पर असमंजस में हैं कि ये स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर टाइप के गेम्स क्यों रखे गए हैं?

    अरेबियन नाइट्स और जातक कथाओं में उत्तराधिकारी की खोज वाले किस्से दफन हैं, वहीं रहते तो ठीक था. गेम्स भी इतने बचकाने कि देखने वाले सर पीट लेते हैं. जैसा कि होता है चारों ही अपने अपने स्किल्स का इस्तेमाल कर के दो दो गेम्स जीत जाती हैं और इस दौरान एक दूसरे के साथ पुराने रिश्ते याद कर के फिर से दोस्ती कर लेती हैं. इस कहानी में एक इनकम टैक्स अफसर भी है जो नकली राजकुमार बन कर नसीर की संपत्ति का आकलन करने के इरादे से चला आता है. एक इनकम टैक्स अफसर इतना मूर्ख हो सकता है ये सिर्फ यहीं संभव था. बाकी सहयोगी कलाकार साधारण ही रहे. रघुवीर यादव भी वेस्ट हुए हैं.

    निर्देशक अनन्या बनर्जी और गौरव के. चावला ने साथ में काफी काम किया है, लिखने का और सहायक निर्देशक का. गौरव ने सैफ अली खान और रोहन मेहरा को लेकर “वॉल स्ट्रीट” का एक और घटिया वर्शन “बाजार” नाम की फ्लॉप फिल्म बनायीं थी. इस वेब सीरीज से भी इन दोनों के करियर को कोई फायदा होगा ऐसा लगता नहीं है. वैसे नसीर, लारा, सोहा या और दूसरे कलाकार आजकल व्यस्त नहीं रहते हैं तो शायद कास्टिंग में ज़्यादा पैसा नहीं लगा होगा, लेकिन थोड़ा पैसा, समय और बुद्धि स्क्रिप्ट लिखने पर भी लगानी चाहिए थी. वैसे गाने तो नहीं हैं लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा लगता है. अनुराग सैकिया लगातार अच्छा काम कर रहे हैं. बाकी सीरीज में ऐसा कुछ नहीं है जो याद रहे, यहां तक कि सिनेमेटोग्राफी भी भी राजस्थान की खूबसूरती दिखाने में असफल रही है. कल जमा इस सीरीज को पुराने राजे रजवाड़ों की ही तरह भूल जाएं तो बेहतर है. समय बचेगा.

    डिटेल्ड रेटिंग

    कहानी :
    स्क्रिनप्ल :
    डायरेक्शन :
    संगीत :

    Tags: Naseeruddin Shah, Web Series

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