Pancreatic Cancer: पुरुषों में ज्यादा होता है पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा, जानें इसके स्टेज और बचाव के तरीके

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हाइलाइट्स

पेंक्रियाज का कैंसर दरअसल कैंसर के सभी रूपों में सबसे भयावह माना जाता है.
यह अग्नाशय में कैंसर सेल्स बनने की वजह से होता है जो रक्त कोशिकाओं में फैलती हैं.
अग्नाशय कैंसर के चार स्टेज होते हैं जिसमें जांच और इलाज की प्रक्रिया शामिल है.

Pancreatic Cancer Stages: भारत में यूं तो पैंक्रियाज यानी अग्नाशय के कैंसर के मरीजों की संख्या बाकी देशों की तुलना में कम है और इसके फैलने की रफ्तार भी दूसरे कैंसर की अपेक्षा कम है लेकिन, ये रफ्तार जानकारी के अभाव में बढ़ रही है. अधिकतर बीमारियां जानकारी के अभाव में लास्ट स्टेज तक पहुंच जाती है औऱ तब तक मरीज या डॉक्टर कुछ खास कर नहीं पाते. इसलिए पैंक्रियाटिक कैंसर के भी सभी स्टेज को जानना जरूरी है क्योंकि बचाव इलाज से बेहतर है. चलिए जानते हैं पैंक्रियाटिक कैंसर के उन चार स्टेज के बारे में जिनके बारे में जानकारी होने पर इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है.

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मायोक्लीनिक के अनुसार देखा जाए तो कैंसर के सभी स्वरूपों में अग्‍नाशय में कैंसर को ज्यादा गंभीर माना जाता है. पेंक्रियाज में कैंसर वाली कोशिकाओं के पैदा होने के कारण पैंक्रियाटिक कैंसर होता है. हालांकि ये कैंसर बढ़ती या बढ़ी हुई उम्र के लोगों में ज्यादा फैलता है. औरतों के मुकाबले पैंक्रियाटिक कैंसर के शिकार मर्द ज्‍यादा होते हैं क्योंकि वो धूम्रपान ज्यादा करते हैं औऱ धूम्रपान पेंक्रियाज के कैंसर का एक कारण है.

पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण –
– पीलिया
– पेट में लगातार दर्द होना
– हल्के रंग का मल आना और मल में चिकनाई महसूस होना
– लगातार कब्ज बने रहना
– पीठ और पेट में लगातार दर्द की समस्या बने रहना
– थकान, बुखार जैसा फील होना
– लीवर में सूजन आना और मतली महसूस होना

पेंक्रियाज कैंसर के चार स्टेज हैं –
पहला स्टेज – हालांकि अधिकतर लोगों को पेंक्रियाज कैंसर के पहले स्टेज का जानकारी ही नहीं मिल पाती. हालांकि इस दौरान शरीर कई तरह के संकेत देता है जिसे मरीज आम बीमारी के संकेत मानकर नजरंदाज कर देता है, जैसे चक्कर आना कमजोरी, भूख ना लगना और पेट में दर्द.

दूसरा स्टेज – पेंक्रियाज कैंसर का सही अंदाजा कैंसर की दूसरी स्टेज में पता चल पाता है. इस स्टेज में कैंसर के लक्षण बढ़ने लगते हैं और कब्ज, पीलिया के साथ साथ लीवर में सूजन आने लगती है. दूसरे स्टेज में अग्नाशय अपनी सही जगह से खिसक कर शरीर को दूसरे अंगों पर प्रेशर डालने लगता है. अग्नाशय खिसकने से लीवर से पित्त रसों का निकलना बढ़ जाता है औऱ वो रस पेंक्रियाज कैंसर के बढ़ने पर खू में जाकर मिलने लगते हैं. इससे पीलिया होता है और लीवर लगातार कमजोर होने लगता है. कई मामलों में लीवर फेल होने पर मरीज की जान पर बन आती है.

तीसरा स्टेज – पेंक्रियाज कैंसर का तीसरा स्टेज डॉक्टर की जांच और इलाज से शुरू होता है. इस दौरान डॉक्टरी जांच होती है और डॉक्टर ये तय करते हैं कि कैंसर शरीर के किन हिस्सों में कहां तक पहुंचा है और शरीर को कितना नुकसान पहुंचा है. इस दौरान दवाएं शुरू होती हैं और कैंसर की सही स्टेजिंग के लिए डॉक्टर TNM पद्वति यानी नंबर सिस्टम का सहारा लेते हैं. इसका मतलब है ट्यूमर, नोड और मेटास्टेसेस. तीसरी स्टेज पर ही डॉक्टर इस बात की तह तक जाते हैं कि कैंसर पैंक्रियाज में कहां तक फैला है और क्या वो लिंफ और नोड्स तक पहुंचा है या नहीं. तीसरी स्टेज ये भी निर्धारित करती है कि कैंसर पैंक्रियाज के बार नजदीकी रक्त कोशिकाओं में भी फैला है या नहीं.

चौथा स्टेज – हालांकि अधिकतर मामलों में मरीज देर से चेत पाते हैं और पैंक्रियाज कैंसर की पहचान ही चौथी स्टेज में हो पाती है जहां आमतौर पर इलाज संभव नहीं हो पाता है. चौथी स्टेज में कैंसर पैंक्रियाज से बाहर की कोशिकाओं में फैल जाता है. इस दौरान कैंसर अग्नाशय के साथ साथ लीवर और फेफड़ों तक फैल जाता है. इस दौरान कीमोथैरेपी, कीमोरेडिएशन थेरिपी, पैलिएटिव सर्जरी, बाईपास सर्जरी और गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी विकल्प के तौर पर मरीज के शरीर और कैंसर की स्थिति को देखकर इलाज के तौर पर किए जाते हैं. दरअसल चौथी स्टेज में केवल दवाओं से इलाज संभव नहीं है और इस दौरान सर्जरी का सहारा लिया जाता है.

पेंक्रियाज जैसी जानलेवा बीमारी से बचे रहने के लिए बचाव जरूरी है. समय रहते इस बीमारी का पता चलना जितना जरूरी है, उतना ही ज्यादा जरूरी है कि इस बीमारी से बचने के उपायों पर अमल किया जाए.

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  • नियमित रूप से व्यायाम और योग करें
  • पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन ना करें
  • धूम्रपान ना करें, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति से भी दूर रहें
  • रेड मीट और अन्य मांसाहारी भोजन की बजाय हरी सब्जियों का सेवन करें
  • वजन को ना बढ़ने दें.
  • लिवर को कमजोर करने वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहें
  • शुगर यानी चीनी का इनटेक कम रखें
  • 45 साल के बाद नियमित तौर पर डॉक्टरी चैकअप जरूर करवाएं

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