Saharsa : सहरसा के इस मंदिर में भक्‍तों को प्रसाद में मिलती है साड़ी और चुनरी, जानें वजह

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रिपोर्ट-मो. सरफराज आलम

सहरसा. बिहार के सहरसा शहर के मत्स्यगंधा इलाके में स्थित रक्त काली मंदिर अपने आप में न सिर्फ अद्वितीय है बल्कि इलाके में मां काली के भक्तों के आस्था का केंद्र भी है. यहां हर दिन सैकड़ों की संख्या में दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और रक्त काली की पूजा-अर्चना करते हैं. अच्छी बात यह कि यहां भक्तों के द्वारा भगवती को चढ़ाए जाने वाले साड़ी और चुनरी को बाद में इच्छुक श्रद्धालुओं को मामूली शुल्क लेकर प्रसाद स्वरुप दिया जाता है, जिसे लेने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है. इस शुल्क को मंदिर के रखरखाव आदि पर खर्च किया जाता है.

सहरसा के मत्स्यगंधा स्थित रक्त काली मंदिर के कमेटी परिषद सदस्य कुमार हीरा प्रभाकर ने बताया कि मंदिर में जो भी प्रसाद के रूप में साड़ी और चुनरी चढ़ाई जाती है, उसे जिला प्रशासन के निर्देश पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में हर दो-तीन माह पर वितरित किया जाता है. इसके लिए सहयोग राशि के तौर पर 101 रुपए का शुल्क रखा गया है, जिसे खुशी-खुशी देकर श्रद्धालु साड़ी और चुनरी प्रसाद स्वरूप ले जाते हैं. वह बताते हैं कि पारदर्शिता और रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए श्रद्धालुओं से उनके आधार कार्ड का नंबर और मोबाइल नंबर भी लिया जाता है.

‘मैया का प्रसाद है यह साड़ी और चुनरी’
मंदिर में मां काली पर चढ़ाई गई साड़ी और चुनरी लेने आई श्रद्धालु मंजू देवी ने बताया कि उन्हें साक्षात आशीर्वाद के रूप में मां काली की साड़ी और चुनरी मिली है. इसे पाकर वह काफी खुश है. उन्होंने बताया कि उन्हें प्रसाद के रूप में यह चुनरी और साड़ी मिली है. जबकि एक अन्य श्रद्धालु संगीता कुमारी ने बताया कि साड़ी और चुनरी पाकर वह काफी खुश दिखीं. जैसे ही उन्हें यह खबर मिली कि मां काली पर चढ़ाई गई साड़ी और चुनरी का वितरण होगा, तो वह रक्त काली मंदिर पहुंच गई. इसी तरह से अन्य श्रद्धालुओं ने भी बताया कि इस साड़ी और चुनरी को वह मां के प्रसाद स्वरूप लेकर घर जाएगी और इसे पूजा घर में रखेगी.

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