Shajapur : बेदखली नोटिस से हड़कंप! वजह-राम मंदिर की जमीन पर मकान, सवाल-तो PM योजना के आवास कैसे बने?

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रिपोर्ट – मोहित राठौर

शाजापुर. ज़िले में एक अजीब मामला सामने आने से न केवल ग्रामीणों बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप जैसी स्थिति है. एक ज़मीन को प्रस्तावित राम मंदिर की ज़मीन बताते हुए नोटिस जारी कर दिया गया है, तो वहां मकानों में रह रहे लोग हैरान रह गए हैं. इन लोगों का कहना है कि बाकायदा पूरी प्रक्रिया के तहत इन्होंने मकान लिये तो कैसे उन्हें नोटिस थमाया जा रहा है. इस मामले में नगर पालिका उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षद भी लोगों के साथ खड़े हो गए हैं और अधिकारियों के बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं.

मामला ऐसा है कि ग्राम मगरिया पहन 35 में स्थित माफी श्री राम मंदिर 3-2 शाजापुर की भूमि पर अतिक्रमण के मामले में सोमवार 14 नवंबर को तहसील कोर्ट की ओर से बेदखली का आदेश जारी किया गया. अतिक्रमण के दायरे में आने वाले भवनों के मालिक नगर पालिका उपाध्यक्ष संतोष जोशी, वार्ड 28 के पार्षद मुकेश दुबे, आशीष नागर आदि को साथ लेकर कलेक्टर दिनेश जैन से मिलने पहुंचे. उन्होंने समय मांगा, तो कलेक्टर ने कहा कि इसमें प्रशासन कुछ नहीं कर सकता. आपको एसडीएम कोर्ट में इसके लिए अपील करना होगी.

लोगों ने दिखाए सबूत और आरोप मढ़े

कलेक्टर से मिलने पहुंचे 37 में से करीब 15 लोगों ने बताया ‘हमने ज़मीन या भवन प्रक्रिया पूरी करने के बाद खरीदे. इसमें जीवनभर को पूंजी लग गई, अब कहा जा रहा है यह ज़मीन राम मंदिर की है. इसमें हमारा क्या दोष है?’ लोगों ने ज़मीन बेचने वालों के नाम भी कलेक्टर को बताए. लोगों ने कहा कि जल्दबाज़ी में बेदखली के आदेश दिए गए. इस पर कलेक्टर ने एसडीएम कोर्ट में अपील की बात कहते हुए तहसीलदार सुनील जायसवाल से भी जवाब मांगा.

एक युवक ने प्रमाण में कलेक्टर को नक्शा दिखाया, पर सील न होने के चलते जैन ने नक्शा खारिज कर दिया. कुछ लोगों ने राजस्व दल के सीमांकन पर आपत्ति उठाई और कहा कि जिस नक्शे के आधार पर सीमांकन हुआ, वही गलत है. धारा 129 का पालन न करने, मंदिर की ज़मीन के रकबे का मिलान न करने व नक्शा बड़ा, छोटा होने जैसे आरोप लगाए.

पीएम आवास के मकान तक कैसे बन गए?

नपा उपाध्यक्ष संतोष जोशी ने कहा यहां रहने वालों ने बैंक से लोन लिया, रजिस्ट्री करवाई, नामांतरण करवाए और तो और यहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी मकान बने. अगर ज़मीन मंदिर की है, तो यह सब प्रक्रिया कैसे हो गई? जोशी ने कहा ऐसे में लोगों का दोष नहीं बल्कि दोषी वे अधिकारी हैं, जिन्होंने लापरवाही की. इन अधिकारियों, कर्मचारियों और धोखे से ज़मीन बेचने वालों पर कार्रवाई होना चाहिए.

तो क्या बोले तहसीलदार?

कलेक्टर के जवाब मांगने पर जायसवाल ने कहा संबंधितों को नोटिस जारी करने के बाद दो बार सुनवाई की गई. किसी ने जवाब दिया तो किसी ने नाम, मेमो प्रस्तुत किया. इसके परीक्षण के बाद बेदखली के आदेश जारी किए गए. जब लोगों ने 700 वर्गफीट के निर्माण पर 1200 वर्गफीट के लिए नोटिस दिए जाने जैसी गड़​बड़ियां बताईं तो तहसीलदार ने कलेक्टर से कहा कि पहले इन लोगों ने नहीं बताया, मौखिक रूप से अब बता रहे हैं. बहरहाल, तहसील का साफ कहना है कि पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन नपा उपाध्यक्ष के आरोपों का कोई जवाब नहीं मिला. कुल मिलाकर मामला अभी पेचीदा होता दिख रहा है.

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