Success story: 1200 रुपए की मजदूरी करने वाला बना फैक्ट्री मालिक, अब करोड़ों का टर्नओवर

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रिपोर्ट- आशीष कुमार

पश्चिमी चम्पारण: कोरोना महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा तो हजारों कामगारों को दिल्ली, मुंबई, हरियाणा, गुजरात और पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों से घर वापस लौटना पड़ा. इन कुशल कारीगरों ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि कुछ महीनों के बाद उनकी खुद की अपनी फैक्ट्री होगी. जिसमें वो दूसरे कारीगरों को रोजगार मुहैया कराएंगे. दरअसल, वैश्विक बंदी के दौरान जब कामगार अपने घर को लौटे तो उनके पास निराशा के अलावे कुछ भी नहीं था.

डीएम कुंदन कुमार ने उन्हें केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के बारे में बताया था. उनकी मदद करते हुए उन्हें 25–25 लाख रुपए का लोन पास करवाया. जिसके बाद चनपटिया के कारीगरों ने अपनी कुशलता के अनुसार अलग-अलग परिधान ट्रैक सूट, शर्ट, जींस, साड़ी, लहंगा, जैकेट, चुनरी तथा ई-रिक्शा तक बनाने की फैक्ट्री डाल ली. जिसे आज विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जाता है. समझने वाली बात ये है कि आज स्टार्टअप जोन में कुल 57 यूनिट्स हैं. जिनमें अलग-अलग वस्तुओं को बनाने का काम किया जाता है.

1 करोड़ का सालाना टर्नओवर
चनपटिया स्टार्टअप जोन में खुद की फैक्ट्री खड़ी कर चुके नंदकिशोर ने बताया कि एक समय था जब वो सूरत में महज 1200 रुपए प्रति माह पर काम काम करते थे. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि आने वाले दिनों में उनकी खुद की अपनी फैक्ट्री होगी. जिसमें वो दूसरों को रोजगार देंगे. नंदकिशोर आज उस फैक्ट्री के मालिक हैं जो 5 हाजर स्क्वायर फीट में फैला है तथा जिसका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ से ऊपर का है.

बता दें कि उनकी फैक्ट्री मेंबड़े पैमाने पर लहंगा, चुनरी तथा साड़ी बनाने का काम किया जाता है. जिसको विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जाता है. वर्तमान में उनकी फैक्ट्री में कुल 40 लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं.

चनपटिया स्टार्टअप जोन ने संजीवनी का किया काम
चनपटिया स्टार्टअप जोन के एक और उद्यमी रमेश ने बताया कि रोजगार की तलाश में अक्सर बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था. कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन भी मुझ जैसे कामगारों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया. डीएम कुंदन कुमार ने बेहतर पहल की जिससे चनपटिया स्टार्टअप जॉन की शुरुआत हुई. जिसके चलते कामगार से फैक्ट्री के मालिक तक का सफर तय कर पाया.

उद्यमी रमेश ने बताया कियहां कॉटन तथा वूलेन टी शर्ट एवं ट्राउजर्स बनाने का काम शुरू किया है तथा खुद का एक ब्रांड क्रिएट किया है. उनकी फैक्ट्री में कुल 25 कारीगरों को उचित वेतन पर रोजगार मिला है.जहां तक बात वार्षिक टर्न ओवर की है तो रमेश के अनुसार साल में वो 4 से 5 करोड़ का व्यापार कर लेते हैं.

सरकार की योजना और खुद के हौसले ने बनाया कामयाब
चनपटिया स्टार्टअप जोन के अध्यक्ष ओम प्रकाश ने बताया कि लॉकडाउन के पहले वो भी दूसरे राज्य में काम किया करते थे. लेकिन आज उनकी भी अपनी एक फैक्ट्री है. दरअसल, वैश्विक मंडी में जब चनपटिया के सभी कारीगर अपने घर वापस आए तब डीएम कुंदन कुमार ने उन्हें केंद्र सरकार की पीएमईजीपीयोजना के तहत कारीगरों को बैंक ऑफ बड़ौदा से लोन की सुविधा उपलब्ध करवाया. जिसके बाद कारीगरों ने अपने अनुभव तथा क्षमता के अनुसार खुद का स्टार्टअप शुरू किया. यहां के कामगारों ने सरकार की मदद और खुद के हौसले से नई इबादत लिखने का काम किया है और अब इसकी धमक विदेशों तक है.

चनपटिया स्टार्टअप जोन का सालाना 10 करोड़ का है टर्नओवर
चनपटिया स्टार्टअप जोन के अध्यक्ष ओम प्रकाश ने बताया किआज आलम ये है कि पूरे जोन में कुल 500 लोगों को रोजगार मिला है. जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं. इतना ही नहीं पूरे जोन को मिलाकर सालाना टर्नओवर कम से कम 10 करोड़ का है. बता दें कि पूरे जोन में कुल 57 यूनिट्स हैं. जिसमें विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को तैयार किया जाता है. सबसे बड़ी बात ये है कि आज चम्पारण के चनपटिया में तैयार की जाने वाली वस्तुओं की मांग सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर हो रही है.

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